हिंदी को नमन
हिंदी हीं है हिंदुस्तान की भाषा, जो करती है पूरी हर जन की आशा सब मजहब के लोग यहां पर समझते हैं सिर्फ हिंदी भाषा। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, हैं भारत में सब भाई - भाई । नहीं किसी से बैर भाव है , करते सभी एक दूजे की भलाई। मिलकर रहना हमारी संस्कृति है, नफ़रत , घृणा की नहीं प्रवृत्ति है । एक बाग के हम सभी फूल हैं, हम सब की एक ही मनोवृत्ति है। जोड़ती है सब को यह हिंदी , बांटती है नहीं कभी यह भाषा । सारे स्वर, व्यंजन इसके अनुपम हैं, जो करती है पूरी हर अभिलाषा। एक ही धरती एक गगन है, प्रकृति यहां की मस्त, मगन है। यहां नहीं कोई भाषाई झगड़ा है मातृभाषा हिंदी को नमन है। उदय नारायण सिंह प्रधानमंत्री जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन मुजफ्फरपुर, बिहार